उत्तराखंड

सिचाई विभाग के टेंडर में एक ही परिवार और एक ही पते का कनेक्शन ? दो फर्में Conflict of Interest में बाहर, – Param Satya

प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल परियोजना में करीब ₹16 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि खर्च होने के बाद उद्घाटन के कुछ ही दिनों में अप्रोच रोड धंसने से निर्माण गुणवत्ता और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब सामने आए Tender Evaluation Record ने मामले में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ दी है।

रिकॉर्ड के अनुसार सिंचाई विभाग के टेंडर में M/S Doon Associates और M/S Himalayan Constructions को Conflict of Interest के आधार पर अयोग्य घोषित किया गया था। उपलब्ध दस्तावेज में दोनों फर्मों से जुड़े व्यक्तियों के पारिवारिक संबंध, Attorney संबंध तथा एक ही पते से संबंधित विवरण दर्ज होने का उल्लेख है। इसी आधार पर ITB Clause 4.3(c) एवं 4.3(d) के तहत दोनों bids को स्वीकार नहीं किया गया।

अगर एक ही परिवार और एक ही पता था, तो सवाल बड़ा है

यदि विभागीय रिकॉर्ड में वास्तव में दोनों फर्मों के संबंधित व्यक्तियों को एक ही परिवार तथा एक ही पते से जुड़ा बताया गया था, तो सवाल यह है कि ऐसे संबंधों की जांच केवल एक tender तक सीमित रही या इन फर्मों की पूरी सरकारी Tender History भी जांची गई?

क्या दोनों फर्मों ने अन्य विभागों में भी एक साथ अथवा अलग-अलग नाम से निविदाएं डालीं?

क्या किसी अन्य सरकारी परियोजना में इनके बीच ऐसा ही संबंध सामने आया, जाँच का विषय है ?

और सबसे महत्वपूर्ण—
> क्या इन फर्मों अथवा उनसे जुड़े व्यक्तियों का नंदा की चौकी परियोजना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध रहा?

यदि कोई संबंध नहीं रहा, तो विभाग को रिकॉर्ड के साथ यह स्पष्ट करना चाहिए। यदि रहा, तो उसकी contractual अनुमति और भूमिका सार्वजनिक होनी चाहिए।

क्या सिर्फ Designer को बलि का बकरा बनाया जा रहा है?

पुल की जांच में यदि डिजाइन संबंधी कमी बताई गई है और Designer/Consultant के विरुद्ध कार्रवाई की तैयारी है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि Design Vetting, DPR/GAD Approval, Site Verification, Construction Supervision, Quality Control, Measurement, Running Bills और Final Payment के दौरान संबंधित सरकारी अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी थी?

यदि डिजाइन गलत था तो उसे किसने जांचकर मंजूर किया?

यदि डिजाइन सही था तो निर्माण और supervision में गलती कहां हुई?

और यदि डिजाइन, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण—सब कुछ सही था, तो उद्घाटन के कुछ दिनों बाद लगभग 20 मीटर अप्रोच रोड कैसे धंस गई?

उत्तराखंड में सरकारी टेंडरों की पूरी जांच जरूरी

मामला किसी व्यक्ति या फर्म को दोषी घोषित करने का नहीं, बल्कि रिकॉर्ड आधारित जांच का है। संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि:
Tender → Bid Evaluation → Conflict-of-Interest Verification → Contractor Selection → Design → Construction → Quality Control → Measurement → Payment → Completion

तक हर स्तर पर किस अधिकारी और किस संस्था की क्या भूमिका रही।

यदि कहीं नियमों की अनदेखी, गलत घोषणा, गलत प्रमाणन अथवा हितों के टकराव का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदारी सिर्फ Consultant पर नहीं बल्कि वास्तविक रूप से जिम्मेदार प्रत्येक स्तर पर तय होनी चाहिए।

उत्तराखंड में सरकारी टेंडर और करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में पारदर्शिता चाहिए तो पूरी Tender History, Conflict-of-Interest Records और Decision Chain सार्वजनिक जांच के दायरे में लानी होगी।





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